NCERT Class 6 History chapter 5: vedas & Graveyard secrets unlocked!

  • NCERT Class 6 History Chapter 5: क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें (Easy Notes & MCQs)

Hello friends,mai khud se padkar likha hu .jiske padne ke baad ek bhi mcq nhi chhuyega …kaisa laga comments

इतिहास को समझने के लिए हमारे पास मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं — पहला लिखित साहित्य (किताबें) और दूसरा पुरातात्विक अवशेष (जैसे कब्रें, कंकाल, औजार आदि)। इस पाठ में हम इन्हीं दो माध्यमों से प्राचीन भारत (वैदिक काल और महापाषाण काल) के जीवन को आसान शब्दों में समझेंगे।

​1. दुनिया के सबसे पुराने ग्रंथों में से एक: ऋग्वेद

​हम सबने वेद का नाम सुना है। वेद कुल चार हैं:

  1. ऋग्वेद (सबसे पुराना)
  2. सामवेद (संगीत का वेद)
  3. यजुर्वेद (यज्ञ और नियमों का वेद)
  4. अथर्ववेद (औषधि और मंत्रों का वेद)

​ऋग्वेद की मुख्य बातें:

  • रचना का समय: ऋग्वेद की रचना आज से लगभग 3500 वर्ष पहले (1500 ईसा पूर्व के आसपास) हुई थी।
  • सूक्त क्या हैं?: ऋग्वेद में 1,000 से भी अधिक प्रार्थनाएँ हैं, जिन्हें ‘सूक्त’ कहा जाता है। ‘सूक्त’ शब्द का मतलब होता है — “अच्छी तरह से बोला गया” या “सुभाषित”
  • प्रमुख देवता: सूक्तों में मुख्य रूप से तीन देवताओं की सबसे ज्यादा स्तुति की गई है:
    1. अग्नि: आग के देवता।
    2. इंद्र: युद्ध और बारिश के देवता।
    3. सोम: एक खास पौधा, जिससे एक विशेष पेय पदार्थ (सोमरस) बनाया जाता था।
  • रचनाकार: वैदिक मंत्रों और सूक्तों की रचना ऋषियों द्वारा की गई थी। अधिकांश रचनाकार पुरुष थे, लेकिन कुछ सूक्तों की रचना महिलाओं (जैसे लोपामुद्रा, घोषा, अपाला आदि) ने भी की थी।
  • ऋग्वेद की भाषा: ऋग्वेद की भाषा वैदिक संस्कृत या प्राक्-संस्कृत है। यह हमारे स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली आधुनिक संस्कृत से थोड़ी अलग थी।

Important notes: उस समय ऋग्वेद को पढ़ा या लिखा नहीं जाता था, बल्कि गुरु अपने शिष्यों को इसे मौखिक रूप से बोलकर और रटवाकर याद करवाते थे। इसे पहली बार लिखा और छापा तो महज 200-300 साल पहले ही गया है!

​2. भाषा-परिवार (Language Families) क्या हैं?

​संसार की अलग-अलग भाषाओं का अपना एक परिवार होता है। यदि दो या दो से अधिक भाषाओं की मूल जड़ें या शुरुआती शब्द एक जैसे हों, तो उन्हें एक ही भाषा-परिवार माना जाता है।

भाषा परिवारशामिल प्रमुख भाषाएँउदाहरण / खासियत
भारोपीय (भारत-यूरोपीय)संस्कृत, हिंदी, गुजराती, असमिया, कश्मीरी, सिंधी, अंग्रेजी, जर्मन, फ्रांसीसी, स्पेनिश, फारसी आदि।संस्कृत का ‘मातृ’, हिंदी का ‘माँ’ और अंग्रेजी का ‘Mother’ एक ही परिवार के होने का सबूत हैं।
द्रविड़ परिवारतमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम।दक्षिण भारत में बोली जाने वाली भाषाएँ।
तिब्बत-बर्मा परिवारभारत के पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम आदि) की भाषाएँ।उत्तर-पूर्वी भारत।
ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवारझारखंड और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बोली जाने वाली भाषाएँ (जैसे संथाली)।मध्य

3. इतिहासकार ऋग्वेद का अध्ययन कैसे करते हैं?

​इतिहासकार सिर्फ पत्थरों और सिक्कों पर निर्भर नहीं रहते, वे ऋग्वेद की पुरानी पांडुलिपियों (Manuscripts) को पढ़कर भी उस समय के समाज का खाका खींचते हैं।

  • भूर्ज वृक्ष की छाल पर पांडुलिपि: कश्मीर में भूर्ज वृक्ष की छाल पर लिखी गई ऋग्वेद की एक पांडुलिपि मिली थी, जो लगभग 150 साल पहले पहली बार अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए इस्तेमाल हुई थी। यह आज पुणे (महाराष्ट्र) की लाइब्रेरी में सुरक्षित है।
  • विश्वामित्र और नदियाँ (संवाद सूक्त): ऋग्वेद में ऋषि विश्वामित्र और दो पवित्र नदियों — व्यास (Beas) तथा सतलुज (Sutlej) के बीच बातचीत का एक सुंदर वर्णन है।
    • ​विश्वामित्र इन नदियों की तुलना ‘तेज भागते घोड़ों’ और ‘अपने बछड़ों को चाटती हुई गायों’ से करते हैं।
    • खास बात: ऋग्वेद में सरस्वती, सिंधु और उसकी सहायक नदियों का बार-बार जिक्र मिलता है, लेकिन गंगा और यमुना का नाम पूरी ऋग्वेद में सिर्फ एक ही बार आया है!

​4. मवेशी, घोड़े, रथ और युद्ध

​वैदिक काल में लोगों के जीवन में मवेशियों (गायों) और घोड़ों का बहुत बड़ा महत्व था।

  • प्रार्थनाएँ: ऋग्वेद में पुत्रों, घोड़ों और मवेशियों की प्राप्ति के लिए बहुत सी प्रार्थनाएँ की गई हैं।
  • युद्ध के कारण: लड़ाई केवल जमीन कब्जाने के लिए नहीं, बल्कि चरगाहों, पानी के स्रोतों, उपजाऊ फसलों (जैसे जौ) और मवेशियों को छीनने के लिए भी लड़ी जाती थी।
  • धन का बंटवारा: युद्ध में जो धन-संपत्ति जीती जाती थी, उसका एक बड़ा हिस्सा सरदार (कबीले का नेता) रखता था, कुछ हिस्सा पुरोहितों (ब्राह्मणों) को दिया जाता था और बाकी हिस्सा आम जनता में बाँट दिया जाता था।
  • यज्ञ और आहुति: जीते गए धन से यज्ञ किए जाते थे। यज्ञ की आग में घी, अनाज और कभी-कभी जानवरों की आहुति देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए दी जाती थी।
  • सेना: उस समय कोई स्थायी (Professional) सेना नहीं होती थी। सभी पुरुष युद्ध में भाग लेते थे। लोग ‘सभाओं’ में मिलकर फैसले लेते थे और अपने में से ही किसी बहादुर योद्धा को अपना सरदार चुनते थे।

​5. समाज का वर्गीकरण (लोगों की पहचान)

​ऋग्वेद के अनुसार लोगों की पहचान उनके काम, भाषा और परिवार के आधार पर की जाती थी:

​काम के आधार पर दो मुख्य वर्ग:

  1. पुरोहित (ब्राह्मण): जो तरह-तरह के यज्ञ, अनुष्ठान और धार्मिक काम करवाते थे।
  2. राजा: ये राजा वैसे नहीं थे जिन्हें हम बाद के इतिहास में पढ़ते हैं। इनके पास न तो कोई बड़ा महल था, न बड़ी राजधानी, न स्थायी सेना और न ही ये जबरन कर (टैक्स) वसूलते थे। राजा की मृत्यु के बाद उसका बेटा अपने आप राजा नहीं बनता था।

​जनता या समुदाय के लिए शब्द:

  • जन (Jana): पूरी जनता या समुदाय के लिए प्रयुक्त शब्द (आज भी हिंदी में ‘जन’ शब्द का प्रयोग होता है)।
  • विश (Vish): इससे ही ‘वैश्य’ शब्द निकला है। ऋग्वेद में पुरू-जन, भरत-जन, और यदु-जन जैसे कई समुदायों के नाम मिलते हैं।

​आर्य और दास/दस्यु:

  • ​जिन लोगों ने ऋग्वेद की प्रार्थनाओं की रचना की, वे खुद को ‘आर्य’ कहते थे।
  • ​उनके विरोधियों को ‘दास’ या ‘दस्यु’ कहा गया। दस्यु वे लोग थे जो यज्ञ नहीं करते थे और अलग भाषाएँ बोलते थे। बाद में ‘दास’ (महिला: दासी) शब्द का अर्थ ‘गुलाम’ हो गया, जिन्हें युद्ध में बंदी बनाया जाता था और वे अपने मालिक की संपत्ति माने जाते थे।

​6. खामोश प्रहरी: महापाषाण (Megaliths) का रहस्य

​जिस समय उत्तर-पश्चिम भारत में ऋग्वेद लिखा जा रहा था, उसी समय भारत के अन्य हिस्सों में एक अलग संस्कृति पनप रही थी — महापाषाण संस्कृति

  • महापाषाण का अर्थ: महा (बड़ा) + पाषाण (पत्थर) = ‘बड़ा पत्थर’
  • शुरुआत: महापाषाण कब्रें बनाने की परंपरा लगभग 3000 साल पहले शुरू हुई थी।
  • क्षेत्र: यह प्रथा मुख्य रूप से दक्कन (मध्य भारत), दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्वी भारत और कश्मीर में प्रचलित थी।
  • कब्रों की पहचान: जमीन के ऊपर या नीचे बड़े-बड़े पत्थरों का गोल घेरा या एक अकेला खड़ा पत्थर लगाकर कब्र की जगह को चिह्नित किया जाता था।

​महापाषाण कब्रों की मुख्य विशेषताएँ:

  • काले-लाल मिट्टी के बर्तन (Black and Red Ware – BRW): मृतकों को खास तरह के बर्तनों के साथ दफनाया जाता था।
  • लोहे के औजार: इन कब्रों में लोहे के हथियार, कुल्हाड़ियाँ, कटार और घोड़ों के सामान मिले हैं। (ध्यान दें: हड़प्पा सभ्यता में लोहा नहीं था, लेकिन महापाषाण काल में लोहे का भरपूर इस्तेमाल होता था)।
  • शिष्ट (Cist) और पोर्ट-होल (Port-hole): कई कब्रें पत्थर के कमरों जैसी होती थीं जिन्हें शिष्ट कहा जाता था। इनमें जाने के लिए एक सुराख होता था जिसे पोर्ट-होल कहते हैं। इसका इस्तेमाल परिवार के अन्य सदस्यों को मृत्यु के बाद उसी कब्र में दफनाने के लिए किया जाता था।

​7. सामाजिक असमानता की जानकारी (कब्रों से)

​पुरातत्ववेत्ताओं को कब्रों में मिले सामान से सामाजिक भेदभाव का पता चलता है:

  • ब्रह्मगिरि का उदाहरण: ब्रह्मगिरि में एक व्यक्ति की कब्र से 33 सोने के मनके (Beads), शंख और तांबे की चूड़ियाँ मिलीं, जबकि दूसरी कब्रों में सिर्फ मिट्टी के बर्तन मिले।
  • निष्कर्ष: इससे साफ पता चलता है कि उस समाज में अमीर और गरीब, तथा सरदार और साधारण प्रजा के बीच आर्थिक व सामाजिक अंतर था।

​8. इनामगाँव (Inamgaon): एक खास ताम्रपाषाणिक स्थल

​इनामगाँव महाराष्ट्र में भीमा नदी की सहायक नदी ‘घोड़’ (Ghod) के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण पुरास्थल है। यहाँ 3600 से 2700 साल पहले लोग रहते थे।

​इनामगाँव में दफनाने के तरीके:

  • वयस्कों को दफनाना: वयस्कों को गड्ढों में सीधा लिटाकर दफनाया जाता था, जिनका सिर हमेशा उत्तर दिशा की ओर होता था।
  • घर के अंदर दफनाना: कई बार लोगों को उनके अपने घरों के अंदर ही दफना दिया जाता था और उनके पास खाने-पीने के बर्तन रख दिए जाते थे।
  • एक खास कब्र (सरदार की कब्र?): एक आदमी को 5 कमरों वाले बड़े मकान के आँगन में 4 पैरों वाले मिट्टी के विशाल संदूक में दफनाया गया था। उसके पैर मुड़े हुए थे और मकान में अनाज का गोदाम भी था। यह शायद बस्ती के सरदार/प्रमुख का शव था।

​इनामगाँव के लोगों का खान-पान और काम-धंधा:

  • खेती: गेहूँ, जौ, चावल, दाल, बाजरा, मटर और तिल की खेती।
  • पशुपालन व शिकार: गाय, बैल, भैंस, बकरी, भेड़, घोड़ा, हिरण, मछली, कछुआ आदि के अवशेष मिले हैं (हड्डियों पर कट के निशान बताते हैं कि इन्हें खाया जाता था)।
  • फल संग्रह: बेर, आँवला, जामुन, खजूर और रसबरी।

​9. कंकालों का अध्ययन और वैद्य चरक

  • लिंग की पहचान कैसे होती है?: कंकाल के साथ मिले गहनों से लिंग का सही अंदाजा नहीं लगता (क्योंकि पुरुष भी गहने पहनते थे)। इसके लिए हिप बोन (श्रोणि क्षेत्र/Pelvic area) को देखा जाता है; महिलाओं का पेल्विक एरिया बच्चों को जन्म देने के कारण पुरुषों से बड़ा होता है।
  • चरक और चरक संहिता: आज से लगभग 2000 साल पहले चरक नाम के प्रसिद्ध वैद्य (Doctor) हुए। उन्होंने ‘चरक संहिता’ नामक पुस्तक लिखी।
    • ​उन्होंने बताया कि मनुष्य के शरीर में 360 हड्डियाँ होती हैं। (आधुनिक विज्ञान में 206 मानी जाती हैं, क्योंकि चरक ने दाँत, जोड़ों और कार्टिलेज को भी हड्डियों में जोड़ लिया था)।

​10. दुनिया के अन्य हिस्से: चीन की भविष्यवाणी वाली हड्डियाँ (Oracle Bones)

  • ​लगभग 3500 साल पहले (जब भारत में ऋग्वेद लिखा जा रहा था), चीन में पशुओं की हड्डियों पर लिखने की कला विकसित हुई।
  • ​इन्हें ‘Oracle Bones’ (भविष्यवाणी करने वाली हड्डियाँ) कहा जाता था।
  • प्रक्रिया: राजा के लिपिक हड्डियों पर सवाल लिखते थे (जैसे — क्या हम युद्ध जीतेंगे? क्या फसल अच्छी होगी?) फिर हड्डियों को आग में डाला जाता था। गर्मी से हड्डियों में दरारें पड़ जाती थीं और ज्योतिषी उन दरारों को देखकर भविष्य बताते थे।

​📌 महत्वपूर्ण तिथियाँ (Quick Revision)……

  • वेदों की रचना की शुरुआत: लगभग 3500 साल पहले (1500 BCE)
  • महापाषाणों के निर्माण की शुरुआत: लगभग 3000 साल पहले (1000 BCE)
  • इनामगाँव में कृषकों का निवास: 3600 से 2700 साल पहले
  • चरक की चरक संहिता: लगभग 2000 साल पहले

​📝 अभ्यास प्रश्न: 10 महत्वपूर्ण MCQs (PYQs आधारित)

​Q1. ऋग्वेद की रचना लगभग कितने वर्ष पूर्व हुई थी?

​(A) 2000 वर्ष पूर्व

(B) 3500 वर्ष पूर्व

(C) 4500 वर्ष पूर्व

(D) 5000 वर्ष पूर्व

उत्तर: (B) 3500 वर्ष पूर्व

​Q2. ऋग्वेद में प्रयुक्त ‘सूक्त’ शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?

​(A) पवित्र मंत्र

(B) ईश्वर का संदेश

(C) अच्छी तरह से बोला गया

(D) यज्ञ की आहुति

उत्तर: (C) अच्छी तरह से बोला गया

​Q3. ऋग्वेद में उल्लिखित तीन प्रमुख देवता कौन-कौन से हैं?

​(A) ब्रह्मा, विष्णु, महेश

(B) अग्नि, इंद्र, सोम

(C) सूर्य, वरुण, वायु

(D) राम, कृष्ण, शिव

उत्तर: (B) अग्नि, इंद्र, सोम

​Q4. संस्कृत भाषा निम्नलिखित में से किस भाषा-परिवार का हिस्सा है?

​(A) द्रविड़ भाषा-परिवार

(B) ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा-परिवार

(C) भारोपीय (भारत-यूरोपीय) भाषा-परिवार

(D) तिब्बत-बर्मा भाषा-परिवार

उत्तर: (C) भारोपीय (भारत-यूरोपीय) भाषा-परिवार

​Q5. ऋग्वेद में किस नदी का उल्लेख केवल एक ही बार हुआ है?

​(A) सरस्वती

(B) सिंधु

(C) व्यास

(D) गंगा

उत्तर: (D) गंगा (गंगा और यमुना दोनों का नाम सिर्फ 1-1 बार आया है)

​Q6. ‘महापाषाण’ (Megaliths) कब्रें बनाने की प्रथा लगभग कितने वर्ष पूर्व शुरू हुई थी?

​(A) 3500 वर्ष पूर्व

(B) 3000 वर्ष पूर्व

(C) 2500 वर्ष पूर्व

(D) 2000 वर्ष पूर्व

उत्तर: (B) 3000 वर्ष पूर्व

​Q7. किस महापाषाणिक स्थल की कब्र से एक व्यक्ति के साथ 33 सोने के मनके और शंख प्राप्त हुए थे?

​(A) इनामगाँव

(B) मेहरगढ़

(C) ब्रह्मगिरि

(D) बुर्जहोम

उत्तर: (C) ब्रह्मगिरि

​Q8. प्रसिद्ध पुरास्थल ‘इनामगाँव’ किस नदी की सहायक नदी के तट पर स्थित है?

​(A) नर्मदा

(B) तापी

(C) घोड़ (भीमा की सहायक)

(D) गोदावरी

उत्तर: (C) घोड़ (भीमा की सहायक)

​Q9. प्रसिद्ध प्राचीन भारतीय वैद्य चरक ने मनुष्य के शरीर में कुल कितनी हड्डियाँ बताई थीं?

​(A) 206

(B) 300

(C) 360

(D) 365

उत्तर: (C) 360

​Q10. लगभग 3500 वर्ष पूर्व भविष्यवाणी करने के लिए पशुओं की हड्डियों (Oracle Bones) का प्रयोग किस देश में होता था?

​(A) मिस्र

(B) चीन

(C) मेसोपोटामिया

(D) यूनान

उत्तर: (B) चीन

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