NCERT Class 6 History Chapter 10:(Short Notes & Full Explanation)

NCERT Class 6 History Chapter 10 के इस अध्याय में हम जानेंगे कि प्राचीन काल में हमारे देश में व्यापार कैसे होता था, उस दौर के राजा कौन थे और विदेशी तीर्थयात्री भारत क्यों आते थे? आइए इस पूरे अध्याय को बहुत ही आसान और सरल शब्दों में समझते हैं।

प्राचीन काल में हमारे देश में व्यापार कैसे होता था? उस दौर के राजा कौन थे और विदेशी यात्री भारत क्यों आते थे? आइए इस पूरे अध्याय को बहुत ही आसान और सरल शब्दों में समझते हैं।

​1. प्राचीन काल में व्यापार और व्यापारी (Trade and Traders)

​उस समय व्यापारी देश-विदेश घूमकर सामान की खरीद-बिक्री करते थे। पुरातात्विक खुदाई से मिले अवशेषों (जैसे बर्तन, सिक्के) से हमें उस दौर के व्यापार की काफी जानकारी मिलती है।

  • रोमन साम्राज्य में भारतीय सामान की मांग:
    • ​दक्षिण भारत अपने सोने, मसालों (विशेषकर काली मिर्च) और कीमती पत्थरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था।
    • ​दक्षिण भारत की काली मिर्च की रोम (Rome) में इतनी ज्यादा मांग थी कि वहाँ के लोग इसे ‘काला सोना’ (Black Gold) कहते थे।
    • ​व्यापारी इन सामानों को जहाजों और रेगिस्तानी रास्तों से रोम भेजते थे। दक्षिण भारत में बड़ी मात्रा में रोमन सोने के सिक्के मिले हैं, जिससे पता चलता है कि उस समय रोम के साथ भारत का व्यापार कितना मजबूत था।
  • व्यापार के रास्ते और मानसून की खोज:
    • ​व्यापारियों ने समुद्र के रास्ते यात्रा करने के लिए मानसूनी हवाओं का फायदा उठाना शुरू किया।
    • ​यदि उन्हें अरब सागर या बंगाल की खाड़ी पार करके भारत के पश्चिमी तट पर पहुँचना होता था, तो वे दक्षिण-पश्चिमी मानसून के साथ जहाज चलाते थे, जिससे यात्रा आसान और सुरक्षित हो जाती थी।

​2. दक्षिण भारत के समृद्ध राजा और तटीय राज्य

​दक्षिण भारत का तटीय इलाका (Coastal Region) पहाड़ों, पठारों और नदियों के मैदानों से घिरा है। यहाँ की कावेरी नदी का मैदानी इलाका सबसे उपजाऊ माना जाता था।

​’मुवेंदार’ (Muventar) – तीन मुख्य राजवंश

​संगम कविताओं में ‘मुवेंदार’ शब्द का जिक्र मिलता है। यह एक तमिल शब्द है जिसका अर्थ होता है — “तीन मुखिया या राजा”। ये तीन प्रमुख परिवार थे:

  1. चोल (Cholas)
  2. चेर (Cheras)
  3. पांड्य (Pandyas)

​ये तीनों राजवंश आज से लगभग 2300 साल पहले दक्षिण भारत में बहुत शक्तिशाली थे।

  • इनकी प्रशासनिक व्यवस्था:
    • ​इन तीनों राजाओं के पास दो-दो सत्ता केंद्र (राजधानियाँ) थीं — एक तटीय इलाके में और दूसरी अंदरूनी इलाके में (कुल 6 बड़े केंद्र)।
    • ​इनमें सबसे प्रसिद्ध केंद्र थे: पुहार / कावेरीपट्टिनम (चोलों का बंदरगाह) और मदुरै (पांड्यों की राजधानी)।
  • टैक्स व्यवस्था: ये राजा लोगों से सीधा टैक्स (कर) वसूलने के बजाय उपहार (Gifts) लेना ज्यादा पसंद करते थे। वे आस-पास के इलाकों से शुल्क भी वसूलते थे और बाकी धन अपने समर्थकों, कवियों और सिपाहियों में बाँट देते थे।

​सातवाहन वंश (Satavahanas)

​लगभग 200 साल बाद (करीब 2100 वर्ष पूर्व) पश्चिम भारत में सातवाहन राजवंश का असर बढ़ा।

  • गौतमी-पुत्र श्री सातकर्णी: सातवाहन वंश का सबसे प्रतापी राजा था। उसके बारे में जानकारी उसकी माँ ‘गौतमी बलश्री’ के अभिलेख से मिलती है।
  • दक्षिणापथ के स्वामी: सातवाहन राजाओं को ‘दक्षिणापथ के स्वामी’ कहा जाता था। ‘दक्षिणापथ’ का शाब्दिक अर्थ है — दक्षिण की ओर जाने वाला रास्ता

​3. रेशम मार्ग की रोचक कहानी (The Story of Silk Route)

​रेशम (Silk) अपनी चमक, चिकनाई और खूबसूरत बुनावट के कारण प्राचीन काल से ही बहुत कीमती माना जाता रहा है।

  • रेशम बनाने की तकनीक: रेशम बनाने की खोज सबसे पहले चीन में लगभग 7000 साल पहले हुई थी। चीन के लोगों ने इस तकनीक को हज़ारों सालों तक दुनिया से छिपाकर रखा।
  • सिल्क रूट (Silk Route): चीन के लोग पैदल, घोड़ों या ऊंटों पर दूर-दूर के देशों में जाते थे और अपने साथ रेशमी कपड़े ले जाते थे। जिस रास्ते से वे यात्रा करते थे, उसे ही ‘सिल्क रूट’ (रेशम मार्ग) कहा जाने लगा।
  • रोम में फैशन: आज से लगभग 2000 साल पहले रोम के राजाओं और अमीर लोगों के बीच रेशमी कपड़ा पहनना एक बड़ा फैशन और स्टेटस सिंबल बन गया था।

​राजा सिल्क रूट पर कब्ज़ा क्यों चाहते थे?

​सिल्क रूट बहुत दुर्गम और खतरनाक रास्तों (पहाड़ों और रेगिस्तानों) से होकर गुज़रता था।

  • ​रास्ते में रहने वाले कबीले व्यापारियों से सुरक्षा के बदले टैक्स (शुल्क) और तोहफे वसूलते थे।
  • ​कई शक्तिशाली राजा इस पूरे रास्ते पर नियंत्रण पाना चाहते थे ताकि व्यापारियों से मोटी चुंगी और टैक्स वसूल सकें। बदले में वे व्यापारियों को डाकुओं से सुरक्षा देते थे।

​कुषाण शासक और सिल्क रूट (Kushanas)

  • ​सिल्क रूट पर नियंत्रण रखने वाले शासकों में सबसे प्रसिद्ध ‘कुषाण’ थे।
  • ​आज से लगभग 2000 साल पहले मध्य एशिया और उत्तर-पश्चिम भारत पर इनका शासन था। पेशावर और मथुरा इनके दो प्रमुख केंद्र थे। तक्षशिला भी इनके राज्य का हिस्सा था।
  • सोने के सिक्के: भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पहले सोने के सिक्के जारी करने वाले शासकों में कुषाण प्रमुख थे। सिल्क रूट पर चलने वाले व्यापारी इन्हीं सिक्कों का इस्तेमाल करते थे।

​4. बौद्ध धर्म का प्रसार (Spread of Buddhism)

​कुषाणों का सबसे प्रतापी राजा कनिष्क (Kanishka) था, जिसने लगभग 1900 साल पहले शासन किया।

  • कनिष्क और बौद्ध धर्म:
    • ​कनिष्क ने एक बौद्ध परिषद (Buddhist Council) का आयोजन किया, जहाँ बौद्ध विद्वान एकत्र होकर गंभीर विषयों पर चर्चा करते थे।
    • ​कवि अश्वघोष, जिन्होंने बुद्ध की जीवनी ‘बुद्धचरित’ लिखी थी, कनिष्क के ही दरबार में रहते थे। इसी काल में बौद्ध विद्वानों ने संस्कृत में लिखना शुरू किया
  • महायान शाखा का जन्म: इसी समय बौद्ध धर्म में एक नई धारा का विकास हुआ जिसे ‘महायान’ (Mahayana) कहा गया। इसकी दो मुख्य विशेषताएँ थीं:
    1. मूर्ति पूजा की शुरुआत: पहले बुद्ध की उपस्थिति को केवल संकेतों (जैसे पीपल के पेड़ के चित्र) द्वारा दिखाया जाता था। अब बुद्ध की सुंदर मूर्तियाँ बनाई जाने लगीं (विशेष रूप से मथुरा और तक्षशिला में)।
    2. बोधिसत्व (Bodhisattva) में आस्था: बोधिसत्व वे लोग माने गए जिन्हें ज्ञान प्राप्त हो चुका था। पहले वे एकांत में ध्यान लगाते थे, लेकिन अब वे दुनिया में रहकर लोगों को शिक्षा देने और मदद करने लगे। बोधिसत्व की पूजा पूरे मध्य एशिया, चीन, कोरिया और जापान में लोकप्रिय हो गई।
  • अन्य क्षेत्रों में बौद्ध धर्म: बौद्ध धर्म दक्षिण-पूर्व दिशा में श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड और इंडोनेशिया तक फैला। इन इलाकों में बौद्ध धर्म का पुराना रूप ‘थेरवाद’ (Theravada) ज्यादा लोकप्रिय हुआ।

​5. विदेशी तीर्थयात्री भारत क्यों आए? (Foreign Pilgrims)

​व्यापारियों के काफिलों और पानी के जहाजों के साथ कई विदेशी बौद्ध तीर्थयात्री भी भारत आए। वे बुद्ध के जीवन से जुड़ी जगहों और प्रसिद्ध मठों को देखने आते थे।

​प्रमुख चीनी यात्री:

  1. फा-शिएन (Faxian): यह लगभग 1600 साल पहले (4थी-5वीं सदी) भारत आया।
  2. श्वैन त्सांग (Xuanzang): यह लगभग 1400 साल पहले (7वीं सदी) भारत आया।
  3. इत्सिंग (I-Qing): यह श्वैन त्सांग के आने के लगभग 50 साल बाद भारत आया।
  • यात्रियों का अनुभव: इन यात्रियों ने अपनी किताबों में भारत यात्रा की कठिन राहों, समुद्री तूफानों और यहाँ के मठों का वर्णन लिखा है।
  • फा-शिएन की वापसी: फा-शिएन जब बंगाल से जहाज द्वारा वापस लौट रहा था, तो भारी समुद्री तूफान में फंस गया था। उसने अपने कपड़े और बर्तन तो फेंक दिए, लेकिन अपनी एकत्र की हुई बौद्ध पाण्डुलिपियों और मूर्तियों को बचाकर चीन ले गया।
  • श्वैन त्सांग की वापसी: श्वैन त्सांग जमीन के रास्ते (उत्तर-पश्चिम और मध्य एशिया होकर) चीन लौटा। वह अपने साथ 600 से अधिक पाण्डुलिपियाँ और मूर्तियाँ 20 घोड़ों पर लादकर ले गया था (जिनमें से 50 पाण्डुलिपियाँ सिंधु नदी पार करते समय बह गई थीं)। उसने अपना बाकी जीवन इनका चीनी भाषा में अनुवाद करने में बिताया।

​नालंदा : शिक्षा का महान केंद्र (Nalanda University)

​श्वैन त्सांग और अन्य तीर्थयात्रियों ने बिहार के प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाई की।

  • ​नालंदा बौद्ध शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र था।
  • ​यहाँ के नियम बहुत सख्त थे। बाहर से आने वाले नए छात्रों को प्रवेश देने से पहले ‘द्वारपाल’ (Gatekeeper) ही कठिन सवाल पूछते थे। 10 में से केवल 2-3 लोग ही प्रवेश परीक्षा पास कर पाते थे।

​6. भक्ति परंपरा की शुरुआत (Beginning of Bhakti Movement)

​इसी समय (लगभग 2000 साल पहले) हिंदू धर्म में देवी-देवताओं जैसे शिव, विष्णु और दुर्गा की पूजा का चलन बहुत बढ़ गया।

  • भक्ति का अर्थ: भक्ति शब्द ‘भज्’ धातु से बना है जिसका अर्थ है — ‘विभाजित करना या हिस्सा बंटाना’। भक्ति भगवान और भक्त के बीच एक अटूट, प्रेमपूर्ण और व्यक्तिगत संबंध है।
  • सभी के लिए खुले द्वार: भक्ति मार्ग की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह अमीर-गरीब, ऊँची जाति-नीची जाति, स्त्री-पुरुष सभी के लिए समान रूप से खुला था।
  • भगवद्गीता का प्रभाव: भक्ति मार्ग की चर्चा हिंदू ग्रंथ भगवद्गीता में मिलती है, जो महाभारत का एक हिस्सा है। इसमें भगवान कृष्ण अपने मित्र अर्जुन को सब धर्म छोड़कर केवल अपनी शरण में आने को कहते हैं।
  • दिखावे का विरोध: भक्ति मार्ग में बाहरी दिखावे और जटिल यज्ञों के बजाय सच्चे मन से ईश्वर की उपासना पर जोर दिया गया।
  • कला और मंदिर निर्माण: भक्त जिस रूप में ईश्वर की कल्पना करते थे (मानव, सिंह या पेड़ के रूप में), कलाकार वैसी ही सुंदर मूर्तियाँ बनाने लगे। धीरे-धीरे इन मूर्तियों को स्थापित करने के लिए विशेष मंदिरों का निर्माण शुरू हुआ।

​7. कुछ अतिरिक्त और महत्वपूर्ण तथ्य (Extra Facts for Competitive Exams)

  • ईसाई धर्म का उदय: लगभग 2000 साल पहले पश्चिम एशिया के बेथलेहेम (Bethlehem) में ईसा मसीह का जन्म हुआ। ईसाइयत भारत के पश्चिमी तट (केरल) पर बहुत शुरुआती समय में पहुँची। केरल के ईसाइयों को ‘सीरियाई ईसाई’ कहा जाता है।
  • ‘हिंदू’ शब्द का निकास: ‘हिंदू’ शब्द ‘सिंधु’ (Indus) नदी से निकला है। यह शब्द अरबों और ईरानियों द्वारा उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया जो सिंधु नदी के पूर्व में रहते थे।
  • मथुरा और गंधार कला शैली: बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण मुख्य रूप से मथुरा और गंधार शैली में शुरू हुआ।

📌 महत्वपूर्ण तिथियाँ (Quick Revision Dates)

घटना / खोजसमय (लगभग)
रेशम बनाने की तकनीक की खोज (चीन)7000 वर्ष पूर्व
चोल, चेर और पांड्य (मुवेंदार) का काल2300 वर्ष पूर्व
रोमन साम्राज्य में रेशम की मांग2000 वर्ष पूर्व
कुषाण राजा कनिष्क का शासन1900 वर्ष पूर्व
चीनी यात्री फा-शिएन का भारत आगमन1600 वर्ष पूर्व
चीनी यात्री श्वैन त्सांग का भारत आगमन1400 वर्ष पूर्व

📝 10 MCQ / PYQ प्रश्न एवं उत्तर (Practice Questions)

Q1. प्राचीन काल में दक्षिण भारत की किस चीज को रोमन साम्राज्य में ‘काला सोना’ (Black Gold) कहा जाता था?

(a) इलायची

(b) रेशम

(c) काली मिर्च

(d) कोयला

उत्तर: (c) काली मिर्च

व्याख्या: दक्षिण भारत की काली मिर्च की रोम में बहुत मांग थी, इसलिए इसे ‘काला सोना’ कहते थे।

Q2. संगम कविताओं में उल्लेखित तमिल शब्द ‘मुवेंदार’ का सही अर्थ क्या है?

(a) तीन व्यापारी

(b) तीन राजा / मुखिया

(c) तीन शहर

(d) तीन बंदरगाह

उत्तर: (b) तीन राजा / मुखिया

व्याख्या: मुवेंदार शब्द का प्रयोग तीन राजवंशों — चोल, चेर और पांड्य के प्रमुखों के लिए किया गया था।

Q3. ‘दक्षिणापथ के स्वामी’ के रूप में किस राजवंश के राजाओं को जाना जाता था?

(a) कुषाण वंश

(b) चोल वंश

(c) सातवाहन वंश

(d) गुप्त वंश

उत्तर: (c) सातवाहन वंश

व्याख्या: सातवाहन शासकों को ‘दक्षिणापथ का स्वामी’ कहा जाता था। इनमें गौतमी-पुत्र श्री सातकर्णी सबसे प्रसिद्ध राजा था।

Q4. भारत में सबसे पहले सोने के सिक्के जारी करने वाले शासक कौन थे?

(a) मौर्य

(b) कुषाण

(c) गुप्त

(d) सातवाहन

उत्तर: (b) कुषाण

व्याख्या: सिल्क रूट पर व्यापार को सुगम बनाने के लिए उपमहाद्वीप में सबसे पहले सोने के सिक्के कुषाणों ने जारी किए थे।

Q5. बुद्ध की प्रसिद्ध जीवनी ‘बुद्धचरित’ की रचना किस विद्वान ने की थी?

(a) बाणभट्ट

(b) अश्वघोष

(c) कालिदास

(d) वसुमित्र

उत्तर: (b) अश्वघोष

व्याख्या: कवि अश्वघोष कुषाण राजा कनिष्क के दरबार में रहते थे और उन्होंने संस्कृत में ‘बुद्धचरित’ लिखी थी।

Q6. बौद्ध धर्म की ‘महायान’ शाखा से संबंधित सही कथन चुनिए:

  1. ​इसमें बुद्ध की मूर्तियों की पूजा शुरू हुई।
  2. ​इसमें ‘बोधिसत्व’ में आस्था बढ़ी। (a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) 1 और 2 दोनों (d) इनमें से कोई नहीं उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों व्याख्या: महायान बौद्ध धर्म में मूर्ति पूजा और बोधिसत्व की अवधारणा मुख्य विशेषताएं थीं।

Q7. भारत आने वाले चीनी बौद्ध यात्रियों का सही कालानुक्रम (Chronological Order) क्या है?

(a) श्वैन त्सांग ➔ फा-शिएन ➔ इत्सिंग

(b) फा-शिएन ➔ श्वैन त्सांग ➔ इत्सिंग

(c) इत्सिंग ➔ फा-शिएन ➔ श्वैन त्सांग

(d) फा-शिएन ➔ इत्सिंग ➔ श्वैन त्सांग

उत्तर: (b) फा-शिएन ➔ श्वैन त्सांग ➔ इत्सिंग

व्याख्या: फा-शिएन (1600 साल पहले), श्वैन त्सांग (1400 साल पहले) और इत्सिंग उसके 50 साल बाद आया।

Q8. प्रसिद्ध प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय ‘नालंदा’ वर्तमान के किस राज्य में स्थित है?

(a) उत्तर प्रदेश

(b) मध्य प्रदेश

(c) बिहार

(d) ओडिशा

उत्तर: (c) बिहार

व्याख्या: नालंदा बिहार में स्थित बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय केंद्र था।

Q9. ‘भक्ति’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत की किस धातु से हुई है?

(a) भज्

(b) भक्

(c) भुज्

(d) भास्

उत्तर: (a) भज्

व्याख्या: ‘भज्’ शब्द का अर्थ है — विभाजित करना या हिस्सा बांटना, जो भक्त और ईश्वर के बीच के संबंध को दर्शाता है।

Q10. चोलों का प्रसिद्ध बंदरगाह (Port City) कौन सा था?

(a) मदुरै

(b) तक्षशिला

(c) पुहार (कावेरीपट्टिनम)

(d) भरूच

उत्तर: (c) पुहार (कावेरीपट्टिनम)

व्याख्या: मुवेंदार के 6 केंद्रों में पुहार (कावेरीपट्टिनम) चोलों का एक मुख्य तटीय बंदरगाह

Q11. [BPSC / CTET] संगमकालीन इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. कावेरी नदी का मैदानी इलाका दक्षिण भारत का सबसे उपजाऊ क्षेत्र था।

2. ‘मुवेंदार’ के अंतर्गत चोल, चेर और पांड्य शासक आते थे।

3. पांड्यों की मुख्य राजधानी पुहार (कावेरीपट्टिनम) थी।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) केवल 1 और 2

व्याख्या: पहला और दूसरा कथन बिल्कुल सही है। तीसरा कथन गलत है क्योंकि पुहार (कावेरीपट्टिनम) चोलों का मुख्य बंदरगाह था, जबकि पांड्यों की राजधानी मदुरै थी।

Q12. [UPSC / State PCS] रेशम मार्ग (Silk Route) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. ​रेशम बनाने की तकनीक का आविष्कार सबसे पहले चीन में लगभग 7000 वर्ष पूर्व हुआ था।
  2. ​रोम में रेशमी कपड़ा पहनना धन-संपदा और प्रतिष्ठा (Status Symbol) का प्रतीक माना जाता था।
  3. ​सिल्क रूट पर नियंत्रण रखने वाले शासकों में सबसे प्रसिद्ध सातवाहन थे।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) केवल 1 और 2

व्याख्या: सिल्क रूट पर सबसे प्रभावशाली नियंत्रण रखने वाले शासक कुषाण थे, न कि सातवाहन। इसलिए कथन 3 असत्य है।

Q13. [CTET / BPSC] कुषाण शासक कनिष्क के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य (Incorrect) है?

(a) कनिष्क ने एक बौद्ध परिषद का गठन किया था जहाँ विद्वान विचार-विमर्श करते थे।

(b) ‘बुद्धचरित’ के रचनाकार अश्वघोष कनिष्क के दरबार में रहते थे।

(c) कनिष्क के समय बौद्ध धर्म की ‘थेरवाद’ शाखा का उदय हुआ।

(d) इस काल में बौद्ध विद्वानों ने संस्कृत भाषा का प्रयोग शुरू कर दिया था।

उत्तर: (c)

व्याख्या: कनिष्क के काल में बौद्ध धर्म की ‘महायान’ (Mahayana) शाखा का विकास हुआ था, न कि थेरवाद का। थेरवाद दक्षिण-पूर्व एशिया (श्रीलंका, म्यांमार आदि) में अधिक प्रचलित हुआ।

Q14. [UPSC Prelims / PCS] बौद्ध धर्म की ‘महायान’ धारा की दो मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?

(a) बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण एवं बोधिसत्व में आस्था

(b) पीपल के वृक्ष की पूजा एवं एकांतवास

(c) केवल पालि भाषा का प्रयोग एवं यज्ञ बलि

(d) बौद्ध संघ का बहिष्कार एवं केवल स्तूप पूजा

उत्तर: (a) बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण एवं बोधिसत्व में आस्था

व्याख्या: महायान शाखा में बुद्ध की प्रतीकात्मक पूजा की जगह मूर्तियाँ बनाई जाने लगीं (मथुरा व तक्षशिला में) और बोधिसत्वों की पूजा लोकप्रिय हुई।

Q15. [CTET / UP TET] चीनी बौद्ध तीर्थयात्री फा-शिएन (Faxian) के बारे में कौन-सा कथन सही है?

(a) वह लगभग 1400 वर्ष पूर्व भारत आया था।

(b) वह अपनी वापसी यात्रा के दौरान बंगाल से समुद्री जहाज पर सवार हुआ था।

(c) उसने अपनी यात्रा में मिली पाण्डुलिपियों को रास्ते में समुद्र में फेंक दिया था।

(d) वह सम्राट अशोक के शासनकाल में भारत आया था।

उत्तर: (b) वह अपनी वापसी यात्रा के दौरान बंगाल से समुद्री जहाज पर सवार हुआ था।

व्याख्या: फा-शिएन लगभग 1600 वर्ष पूर्व भारत आया था। वापसी में उसने बंगाल से जहाज लिया और समुद्री तूफान के बावजूद अपनी संकलित पाण्डुलिपियों और मूर्तियों को सुरक्षित बचाया।

Q16. [BPSC Teacher / CTET] प्राचीन काल में प्रसिद्ध ‘नालंदा विद्या केंद्र’ (बिहार) में प्रवेश हेतु क्या प्रक्रिया थी?

(a) सीधे शुल्क (Fees) जमा करके प्रवेश मिलता था।

(b) राजा की सिफारिश पर प्रवेश दिया जाता था।

(c) ‘द्वारपाल’ द्वारा पूछे गए कठिन प्रश्नों का सही उत्तर देना अनिवार्य था।

(d) केवल विदेशी छात्रों को बिना परीक्षा प्रवेश मिलता था।

उत्तर: (c) ‘द्वारपाल’ द्वारा पूछे गए कठिन प्रश्नों का सही उत्तर देना अनिवार्य था।

व्याख्या: श्वैन त्सांग के अनुसार, नालंदा में प्रवेश के लिए द्वारपाल ही कठिन प्रश्न पूछते थे, जिसे पास करने वाले 10 में से केवल 2-3 छात्र ही अंदर प्रवेश पा पाते थे।

Q17. [State PCS / UPSC] प्राचीन भारत में विकसित ‘भक्ति मार्ग’ के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?

(a) भक्ति मार्ग का उल्लेख हिंदू ग्रंथ ‘भगवद्गीता’ में मिलता है।

(b) इसमें बाहरी आडंबर और यज्ञों की तुलना में ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत पूजा पर बल दिया गया।

(c) भक्ति मार्ग के द्वार केवल उच्च जातियों और पुरुषों के लिए खुले थे।

(d) ‘भक्ति’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘भज्’ शब्द से हुई है जिसका अर्थ हिस्सा बाँटना है।

उत्तर: (c)

व्याख्या: भक्ति मार्ग की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यह स्त्री-पुरुष, अमीर-गरीब और सभी जातियों (ऊँची या नीची) के लिए समान रूप से खुला था।

Q18. [UPSC / BPSC] सातवाहन राजा ‘गौतमी-पुत्र श्री सातकर्णी’ के बारे में जानकारी का मुख्य स्रोत क्या है?

(a) कौटिल्य का अर्थशास्त्र

(b) उसकी माँ ‘गौतमी बलश्री’ का अभिलेख

(c) मेगास्थनीज की इंडिका

(d) ह्वेनसांग का यात्रा वृतांत

उत्तर: (b) उसकी माँ ‘गौतमी बलश्री’ का अभिलेख

व्याख्या: गौतमी-पुत्र श्री सातकर्णी के पराक्रम और शासन की जानकारी उसकी माँ गौतमी बलश्री द्वारा लिखवाए गए एक अभिलेख से मिलती है।

Q19. [CTET / BPSC] ‘दक्षिणापथ’ का शाब्दिक अर्थ क्या है और इस पर किस राजवंश का नियंत्रण था?

(a) उत्तर की ओर जाने वाला रास्ता – चोल वंश

(b) दक्षिण की ओर जाने वाला रास्ता – सातवाहन वंश

(c) पूर्व की ओर जाने वाला रास्ता – कुषाण वंश

(d) पश्चिम की ओर जाने वाला रास्ता – चेर वंश

उत्तर: (b) दक्षिण की ओर जाने वाला रास्ता – सातवाहन वंश

व्याख्या: ‘दक्षिणापथ’ का अर्थ दक्षिण की तरफ जाने वाला मार्ग है और सातवाहन राजाओं को ‘दक्षिणापथ के स्वामी’ कहा जाता था।

Q20. [UPSC / PCS] ईसाई धर्म के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. ​ईसा मसीह का जन्म बेथलेहेम में हुआ था जो उस समय रोमन साम्राज्य का हिस्सा था।
  2. ​भारत के पश्चिमी तट (केरल) के ईसाइयों को ‘सीरियाई ईसाई’ कहा जाता है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

व्याख्या: दोनों कथन सत्य हैं। ईसा मसीह के उपदेश पश्चिमी एशिया से होते हुए भारत के पश्चिमी तट तक पहुँचे। केरल के ईसाई विश्व के सबसे पुराने ईसाइयों में से एक हैं और इन्हें ‘सीरियाई ईसाई’ कहा जाता है।

NCERT Class 6 History (इतिहास): अध्याय 3
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